उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 4 अक्टूबर 2026 को चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्यहित से जुड़े विभिन्न विभागों के 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। इन फैसलों में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के कौशल विकास, भूमि अधिकार, वन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, कृषि, पशुपालन, सिंचाई, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं से जुड़े विषय शामिल हैं।
मंत्रिमंडल ने वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रियाओं के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन आरेखन के परीक्षण और नोडल कार्यालय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नोडल अधिकारी, वन संरक्षण, उत्तराखण्ड के कार्यालय में परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) के गठन तथा इसके लिए 6 पदों की स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्रिमंडल ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण के लिए हस्तांतरित परिसंपत्तियों के संबंध में उत्तराखण्ड ट्रेड एण्ड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को ₹66.2916 करोड़ की अवशेष धनराशि अवमुक्त किए जाने को मंजूरी दी है। यह धनराशि कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के अनुसार नवनिर्माण एवं अन्य निर्धारित कार्यों पर व्यय की जाएगी।

धामी कैबिनेट ने स्टाम्प एवं निबंधन विभाग अंतर्गत संपत्ति के क्रय-विक्रय से संबंधित लेन-देन में क्रेता-विक्रेता एवं अन्य संबंधित पक्षकारों द्वारा उपलब्ध कराए गए PAN के सत्यापन (PAN Verification) की व्यवस्था लागू किए जाने को मंजूरी दी है।

मंत्रिमंडल ने वन विभाग के विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत निदेशक, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व को विभागाध्यक्ष की सूची से हटाते हुए मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं, उत्तराखण्ड, नैनीताल एवं मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल, उत्तराखण्ड, पौड़ी को विभागाध्यक्ष घोषित किया जाएगा।

राज्य अधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर आरक्षण प्रक्रिया विखण्डन (संशोधन) नियमावली, 2026 का प्रख्यापन को मंत्रिमण्डल ने भी मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने राज्य अधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर आरक्षण प्रक्रिया विखण्डन (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान की है।

इसके साथ ही कई औैर अहम प्रस्तावों पर धामी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। सीएम धामी का कहना है कि हमारा प्रयास है कि कैबिनेट बैठकें केवल देहरादून तक सीमित न रहें, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आयोजित हों, ताकि स्थानीय समस्याओं, संभावनाओं और विकास की प्राथमिकताओं को और करीब से समझते हुए प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
