उत्तराखंड में राज्यसभा की रिक्त होने वाली एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिनेश आर्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को उनके नाम पर मुहर लगाई। प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसी के चलते उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराया जा रहा है। चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इसी दिन मतगणना भी प्रस्तावित है।
24 नामों पर हुआ था मंथन
भाजपा में राज्यसभा प्रत्याशी के चयन को लेकर प्रदेश से लेकर केंद्रीय स्तर तक विचार-विमर्श किया गया। प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी में करीब 24 नामों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व को 15 नामों का पैनल भेजे जाने की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दी थी। केंद्रीय चुनाव समिति ने अब दिनेश आर्य के नाम को अंतिम रूप दिया है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दिनेश आर्य को बधाई दी है।
लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं दिनेश आर्य
दिनेश आर्य लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी। उस समय उन्होंने स्वयं के वर्ष 2002 से भाजपा में सक्रिय होने की बात कही थी।
आर्य भाजपा सरकार में राज्य पेयजल अनुश्रवण समिति के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में प्रदेश स्तर पर कार्य कर चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और पूर्व जिम्मेदारियों को उनके राजनीतिक अनुभव का हिस्सा माना जा रहा है।
16 अक्टूबर को मतदान
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अब नामांकन और आगे की निर्धारित औपचारिकताएं महत्वपूर्ण होंगी। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना होनी है। अंतिम चुनावी स्थिति नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा के संख्याबल को देखते हुए पार्टी अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर आश्वस्त हो सकती है, हालांकि अंतिम परिणाम निर्धारित चुनावी प्रक्रिया और मतगणना के बाद ही घोषित होगा।
दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा के संगठनात्मक और सामाजिक प्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजरें नामांकन, मतदान और अंतिम परिणाम पर रहेंगी।
