उत्तराखंड में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुर्वेदिक यानी BAMS इंटर्न डॉक्टर आंदोलन पर उतर आए हैं। हरिद्वार में गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के बाहर BAMS इंटर्न डॉक्टर धरने पर बैठ गए हैं। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि जब वे MBBS इंटर्न डॉक्टरों के समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं तो फिर स्टाइपेंड के मामले में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
BAMS इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि राज्य सरकार ने MBBS इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 17 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया है, लेकिन आयुर्वेदिक BAMS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनके मुताबिक वर्तमान में BAMS इंटर्न डॉक्टरों को करीब 15 हजार रुपये प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है।
इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि BAMS और MBBS इंटर्न डॉक्टरों को समान स्टाइपेंड दिया जाए। आंदोलन कर रहे डॉक्टरों की मांग करीब 30 हजार रुपये स्टाइपेंड किए जाने की है।
NCISM के निर्देश का भी दिया जा रहा हवाला
BAMS इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांग के समर्थन में भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग यानी NCISM के हालिया निर्देश का भी हवाला दिया है। NCISM ने 15 सितंबर 2026 को जारी पत्र में National Commission for Indian System of Medicine (Minimum Standards of Undergraduate Ayurveda Education) Regulations, 2022 के Regulation 15(d) का उल्लेख करते हुए कहा है कि सरकारी संस्थानों में इंटर्नशिप कर रहे BAMS इंटर्न को स्टाइपेंड दिया जाना चाहिए।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के संस्थानों में इंटर्नशिप करने वाले BAMS इंटर्न को संबंधित सरकार के अधीन अन्य मेडिकल सिस्टम के इंटर्न को मिलने वाले स्टाइपेंड के समान दर पर स्टाइपेंड दिया जाना चाहिए। मेडिकल सिस्टम के आधार पर स्टाइपेंड में असमानता नहीं होनी चाहिए।
NCISM ने संबंधित विश्वविद्यालयों और आयुर्वेद कॉलेजों एवं संस्थानों को इस प्रावधान का कड़ाई से पालन करने और निर्धारित मानकों के अनुसार BAMS इंटर्न को स्टाइपेंड का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
अब आगे क्या करेंगे इंटर्न डॉक्टर?
गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के अलावा प्रदेश के दूसरे आयुर्वेदिक कॉलेजों से जुड़े BAMS इंटर्न डॉक्टरों ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल वे हर दिन करीब 2 घंटे सांकेतिक धरना देंगे। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांग पर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कामकाज छोड़कर धरना स्थल पर बैठने का कदम भी उठाया जा सकता है।
क्या होता है स्टाइपेंड?
स्टाइपेंड इंटर्नशिप या प्रशिक्षण के दौरान संस्थान या सरकार की ओर से इंटर्न को दी जाने वाली निर्धारित मासिक राशि होती है। मेडिकल इंटर्न डॉक्टरों को अस्पताल में व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों में भी जिम्मेदारी निभानी होती है।
फिलहाल BAMS इंटर्न डॉक्टरों की मांग का मुख्य आधार यही है कि जब सरकारी संस्थानों में अलग-अलग मेडिकल सिस्टम के इंटर्न समान स्तर की इंटर्नशिप कर रहे हैं तो स्टाइपेंड में भी समानता होनी चाहिए।
