प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर देहरादून जिले के हरिपुर कालसी में माँ यमुना का तट आस्था, संस्कृति और विकास के रंग में नजर आया। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 2100 दीपों से यमुना तट को रोशन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के साथ माँ यमुना की आरती में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया गया।
मुख्यमंत्री ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा 7.52 करोड़ रुपये की लागत से विकसित स्नान घाट भी जनता को समर्पित किया। यमुना नदी के दायीं ओर विकसित यह घाट 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। परियोजना में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यमुना तट के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं
एमडीडीए द्वारा विकसित स्नान घाट पर नदी की ओर 170 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची दो आरसीसी सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया गया है। करीब 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में आरसीसी और रेड सैंड स्टोन से दो प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। श्रद्धालुओं को नदी तक सुरक्षित पहुंच उपलब्ध कराने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। वहीं, माँ यमुना की आरती के आयोजन के लिए चार आरसीसी आरती स्थल विकसित किए गए हैं।
रात के समय बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए घाट पर 25 सोलर लाइटें लगाई गई हैं। आगंतुकों के बैठने के लिए शेड के साथ 12 बेंच स्थापित की गई हैं। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय और चेंजिंग रूम का नवीनीकरण किया गया है। इसके अलावा पेयजल के लिए वाटर स्पाउट की व्यवस्था की गई है।
नदी किनारे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करीब 300 मीटर लंबी स्टेनलेस स्टील (एसएस) रेलिंग और एसएस चेन लगाई गई है। इन व्यवस्थाओं से स्नान और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध होगा।
प्रतिदिन माँ यमुना की आरती के लिए मिलेंगी सुविधाएं
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि हरिपुर कालसी का यमुना तट लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। यहां पहले साप्ताहिक रूप से माँ यमुना की आरती आयोजित होती रही है। नए घाट के विकसित होने से अब प्रतिदिन आरती के आयोजन के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। उन्होंने बताया कि घाट पर बनाई गई सुरक्षा दीवारें यमुना के जलस्तर में वृद्धि के दौरान तटवर्ती क्षेत्र की सुरक्षा में भी सहायक होंगी।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है हरिपुर कालसी
देहरादून-चकराता राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर देहरादून से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित हरिपुर कालसी जौनसार-भाबर क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आसपास अशोक शिलालेख, देवस्थल मंदिर और अश्वमेघ यज्ञ स्थल जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
नए स्नान घाट, हरिघाट के लोकार्पण और माँ यमुना कृष्ण मंदिर के शिलान्यास के साथ हरिपुर कालसी में धार्मिक गतिविधियों के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ है। 2100 दीपों से जगमगाए यमुना तट पर आयोजित कार्यक्रम ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को भी विशेष रूप से सामने रखा।
