उत्तराखंड में इन दिनों ऑपरेशन कालनेमि चल रहा है। इस ऑपरेशन का मकसद भगवा चोला पहनकर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले लोगों को चिन्हित करना है। जिसके तहत देहरादून, हरिद्वार और अन्य जिलों में पुलिस द्वारा सख्त एक्शन लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह के निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान 24 घंटे के अंदर ही काफी फैल गया है। हरिद्वार से लेकर, राजधानी देहरादून समेत देवभूमि के कई शहरों में फर्जी बाबा पकड़ गए हैं।
सीएम धामी के निर्देश पर ऑपरेशन कालनेमि
ऑपरेशन कालनेमि के तहत उत्तराखंड पुलिस शहर, गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे और जंगलों के आसपास ऐसे भगवा भेषधारियों को पकड़ रही है, जिनका सनातन से कोई सरोकार नहीं है। धार्मिक वेशभूषा पहनकर लोगों को ठगने और धोखा देने का काम करने वाले ऐसे लोगों को पुलिस चिन्हित कर सख्त कार्रवाई कर रही है। कई बार देखा गया है कि असामाजिक तत्व भी भगवा वेषधारण कर लेते हैं। जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो जाती है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाए जा रहे इस ऑपरेशन के तहत उन्हीं लोगों को पकड़ा जा रहा है जो लोगों से ठगी कर रहे हैं. गली-मोहल्लों में घूम रहे ऐसे लोगों को पुलिस पकड़कर पूछताछ कर रही है। पूछताछ में अगर कोई सही में साधु-संत, फकीर और फक्कड़ है तो उसके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

अगर कोई व्यक्ति किसी अपराध के तहत भगवा वस्त्र धारण कर रहा है या फिर लोगों को प्रलोभन दे रहा है और उसके एवज में पैसे ले रहा है तो उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 170 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
कालनेमि के बारे में जानिए:
मगर आपके जेहन में सवाल ये उठ रहा होगा कि आखिरकार ये कालनेमि है क्या। जिस कालनेमि के नाम से ऑपरेशन चल रहा है, दरअसल वो कालनेमि रावण का मामा और एक शक्तिशाली असुर था। जो अपनी चालाकी और जादुई शक्तियों के लिए जाना जाता था। कालनेमि की कहानी रामायण के युद्धकांड में आती है, जब रावण ने उसे हनुमान जी को रोकने के लिए भेजा था। रामायण के अनुसार, जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर जा रहे थे, तब रावण को यह बात पता चल गई थी कि अगर हनुमान जी संजीवनी लाने में सफल हो गए, तो लक्ष्मण को बचा लिया जाएगा, तब रावण का विनाश तय था।
तभी रावण ने अपने मामा कालनेमि को हनुमान जी को रोकने का आदेश दिया था। कालनेमि ने अपनी मायावी शक्तियों का उपयोग करते हुए एक साधु का रूप धारण किया। उसने एक सुंदर आश्रम बनाया और हनुमान जी को वहां रुकने के लिए आमंत्रित किया। कालनेमि का उद्देश्य हनुमान जी को भटकाना और समय बर्बाद करना था, ताकि वह संजीवनी लाने में देर कर दें। उसने हनुमान जी को भोजन और विश्राम का लालच दिया। मगर हनुमान जी की बुद्धिमत्ता और भक्ति के आगे कालनेमि की चाल नाकाम रही, हनुमान जी ने साधु के भेष में कालनेमि की मंशा को भांप लिया। क्रोधित होकर हनुमान जी ने कालनेमि का वास्तविक रूप देखा और उसका वध कर दिया। इसके बाद, हनुमान जी ने बिना किसी देरी के संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण की जान बचाई। रावण के मामा के नाम पर ही देवभूमि उत्तराखंड में ऑपरेशन कालनेमि चल रहा है।
