उत्तरकाशी: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने उत्तरकाशी कलेक्ट्रेट सभागार में जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक की। बैठक में जिला योजना, राज्य वित्त, 25 सूत्रीय कार्यक्रम और केंद्र पोषित विभिन्न विकास कार्यक्रमों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से स्वीकृत योजनाओं की वर्तमान स्थिति और निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष हुई प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने सभी विभागों को विकास कार्यों में तेजी लाने और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। इस दौरान जनपद में संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी को एक स्थान पर उपलब्ध कराने वाली डिजिटल पहल ‘योजना दीदी’ ई-पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि सभी स्वीकृत निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए। बैठक में धरातल पर योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी लेने के लिए विभागाध्यक्षों को नियमित निरीक्षण करने और आपसी समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। लंबित मामलों का अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता केवल स्वीकृति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
धामों और धार्मिक स्थलों में स्वच्छता पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी के धामों और धार्मिक स्थलों में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से उत्तरकाशी महत्वपूर्ण जिला है, इसलिए यहां स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने बीआरओ, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और स्थानीय नगर निकायों को आगामी 15 अक्टूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सड़क सुधार कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने और आम लोगों के लिए सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पूरा पालन किया जाए। विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर सड़क की स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क लोगों की मूलभूत जरूरतों से जुड़ा है, इसलिए इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर समस्याओं का तत्काल समाधान करने को कहा गया। अधिकारियों को तय समयसीमा में कार्य पूरा कर प्रगति की रिपोर्ट सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
पॉलीहाउस और जायका परियोजना की भी समीक्षा
मुख्य सचिव ने उद्यान विभाग के तहत पॉलीहाउस निर्माण और जायका परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष धीमी प्रगति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को उद्यान विभाग की योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी और कृषि आधारित गतिविधियां स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़ी हैं, इसलिए इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना आवश्यक है। इसके साथ ही जिला सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित सैनिक कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की वित्तीय और भौतिक प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने विभागीय स्तर पर लक्ष्य निर्धारित कर नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए। अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति देखने और लाभार्थियों से फीडबैक लेने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विकास कार्यों की गति बढ़ाने के साथ-साथ योजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
गंगोत्री और यमुनोत्री की हिमालयी नदियों के संरक्षण की पहल
बैठक के दौरान बताया गया कि जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और उत्तराखण्ड राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रारंभ – नदी, जलीय संसाधनों का संरक्षण और जैव विविधता विरासत प्रबंधन’ परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एवं व्यय की मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ‘स्वच्छ गंगा, निर्मल एवं अविरल यमुना’ के संकल्प के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्रों की हिमालयी नदियों के संरक्षण के लिए जिला स्तरीय मॉडल का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3.26 करोड़ रुपये बताई गई है। परियोजना का उद्देश्य हिमालयी नदी तंत्र, जलीय संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में प्रभावी प्रयास करना है।
उत्तरकाशी में गंगा और यमुना की प्रमुख सहायक नदी प्रणालियों तथा उनसे जुड़े पर्यावरणीय क्षेत्रों का विशेष महत्व है। ऐसे में नदी संरक्षण से जुड़े कार्यों को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को परियोजना के निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने नदी और जल स्रोतों के संरक्षण के साथ पर्यावरणीय विरासत को सुरक्षित रखने के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता बताई। परियोजना के माध्यम से नदी संरक्षण और जैव विविधता प्रबंधन को स्थानीय विकास गतिविधियों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल को उत्तरकाशी के हिमालयी क्षेत्रों में जल संसाधनों और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
