आपातकाल के 51 वर्ष पूरे, मुख्यमंत्री धामी ने लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित
आपातकाल (Emergency) के 51 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके साहस, संघर्ष और त्याग को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान देश के इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था आपातकाल- CM धामी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब देश में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिए गए थे। उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अभूतपूर्व दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक था।
लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके साहस, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने अंधकारमय दौर में भी लोकतंत्र की ज्योति को प्रज्वलित रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे सेनानियों का सम्मान करना केवल उनका अभिनंदन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना भी है।
नई पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए। लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के मूल्यों और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से ही संभव है।
