तीसरी शीतकालीन दर्शन यात्रा पर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में आयोजित तीसरी शीतकालीन दर्शन यात्रा के तहत देश के 12 राज्यों से आए करीब 200 तीर्थ यात्रियों ने चार धामों के शीतकालीन पूजा स्थलों में दर्शन किए। इस यात्रा दल में ब्राजील और नेपाल से आए दो विदेशी श्रद्धालु भी शामिल रहे।
शीतकालीन तीर्थ दर्शन यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यह संदेश देना है कि शीतकाल में भी चार धामों के दर्शन का वही आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है, जो ग्रीष्मकाल में धामों में स्थित मंदिरों के दर्शन से मिलता है।
ज्योतिर्मठ के प्रभारी दंडी स्वामी चैतन्य मुकुंदानंद गिरि ने बताया कि शीतकालीन तीर्थ यात्रा के लिए ज्योतिर्मठ तीर्थ यात्रा सेवालय में देश और विदेश से कुल 2150 तीर्थ यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से पहले चरण में 200 तीर्थ यात्रियों ने चारों धामों के शीतकालीन पूजा स्थलों में दर्शन किए।
उन्होंने कहा कि यात्रा सेवालय में पंजीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी है और सुविधानुसार तीर्थ यात्री चार धामों के शीतकालीन पूजा स्थलों में दर्शन के लिए आते रहेंगे। दंडी स्वामी ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार शीतकालीन यात्रा करते रहेंगे।
इधर उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि ज्योतििष पीठ के शंकराचार्य के सानिध्य में लगातार तीसरी बार आयोजित शीतकालीन तीर्थ दर्शन यात्रा ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है और उम्मीद है कि शंकराचार्य की इस पहल से आने वाले वर्षों में शीतकालीन यात्रा को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

