मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरियाणा के पंचकुला स्थित ताऊ देवीलाल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित ‘नमो क्रिकेट लीग’ में प्रतिभाग कर युवा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री स्वयं खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलने मैदान पर उतरे और युवाओं का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री को अपने बीच क्रिकेट खेलते देख खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल के मैदान में उतरने का अपना ही आनंद है। खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि खेल हमें सिखाता है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीम भावना, निरंतर प्रयास, अनुशासन और पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।
‘नमो क्रिकेट लीग’ में देश के विभिन्न हिस्सों से 30 से अधिक टीमों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से संवाद कर उनकी खेल प्रतिभा और उत्साह की सराहना की तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और युवाओं को नशे के खिलाफ शपथ दिलाई। उन्होंने युवाओं से नशे से पूरी तरह दूर रहने तथा अपने साथियों और समाज के अन्य युवाओं को भी नशे की आदत से बचाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘क्रिकेट को हां और नशे को ना’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि युवाओं को स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन की ओर ले जाने का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कोई लत लगानी ही है तो खेल और फिटनेस की लत लगाएं। यदि कोई जुनून पालना है तो अपने सपनों और लक्ष्यों को हासिल करने का जुनून पालें। युवाओं की ऊर्जा नशे में नहीं, बल्कि खेल, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण में लगनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई पहचान और सम्मान मिला है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे अभियानों ने युवाओं को खेलों और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज देश के गांवों और छोटे शहरों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती खेल प्रतिभाओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, राष्ट्रमंडल खेलों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों का परिश्रम, अनुशासन, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण होता है। युवाओं को खेलों से जोड़कर उनके भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत किया जा सकता है।
