मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 138वां संस्करण सुना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ देशवासियों के सकारात्मक प्रयासों, उपलब्धियों और प्रेरक कार्यों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ लोगों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखण्ड के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में चल रहे जनगणना कार्य का उल्लेख किया। केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2026 में उत्तराखण्ड के चार हिमाच्छादित जिलों चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के 131 हिमाच्छादित गांवों तथा तीन शहरी स्थानीय निकायों में जनगणना कार्य शुरू किया गया है।
प्रधानमंत्री ने चमोली जनपद के देश के प्रथम गांव माणा का विशेष उल्लेख करते हुए यहां जनगणना की शुरुआत 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत से किए जाने की जानकारी दी। उत्तरकाशी के बगोरी गांव का भी उल्लेख किया गया, जहां होमस्टे संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर स्व-गणना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा और बगोरी जैसे सीमांत गांवों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि इन उदाहरणों से सीमांत क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता और राष्ट्रीय दायित्वों में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सामने आती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना में अपनी सही जानकारी दर्ज कराने और इस राष्ट्रीय दायित्व में पूर्ण सहयोग देने की अपील की।
सीमांत गांवों के उल्लेख को मुख्यमंत्री ने बताया महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के सीमांत गांव देश की भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थित हैं और यहां रहने वाले लोगों की राष्ट्रीय गतिविधियों में भागीदारी का विशेष महत्व है। ‘मन की बात’ में माणा और बगोरी जैसे गांवों के उदाहरण सामने आने से इन क्षेत्रों में हो रहे बदलाव और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग की जानकारी देश के सामने पहुंची है। प्रधानमंत्री ने जनगणना को प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए देशवासियों से इसमें सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने भी प्रदेश के लोगों से जनगणना के दौरान अपनी जानकारी सही तरीके से दर्ज कराने और अधिकारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की अपील की। उत्तराखण्ड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना के लिए प्रशिक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर कार्य कर रहे हैं तथा केंद्र सरकार के अनुसार विशेष अभियान चार हिमाच्छादित जिलों में संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना के माध्यम से उपलब्ध होने वाली सही जानकारी भविष्य की योजनाओं और नीतियों के लिए उपयोगी आधार बनती है। उन्होंने लोगों से जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की गलत जानकारी दर्ज नहीं कराने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी विकास और प्रशासनिक योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान डिजिटल माध्यम से स्व-गणना जैसे प्रयासों को भी लोगों की बढ़ती डिजिटल जागरूकता से जोड़कर देखा गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय दायित्व से जुड़े इस अभियान में जिम्मेदारी के साथ भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का सहयोग जनगणना प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान देता है।
