उत्तराखंड के राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह (रि) ने हायर कमांड कोर्स के अधिकारियों के साथ आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सार्थक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बदलते सुरक्षा वातावरण तथा सैन्य नेतृत्व में तकनीकी अनुकूलन की बढ़ती आवश्यकता पर चर्चा की।
राज्यपाल ने कहा कि युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और इसके साथ सैन्य नेतृत्व को भी अपनी कार्यशैली एवं रणनीतिक दृष्टिकोण में निरंतर बदलाव करना होगा। आधुनिक संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अन्य उभरती तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य अधिकारियों के लिए नई तकनीकों की समझ और उनका प्रभावी उपयोग महत्वपूर्ण होगा। तकनीकी दक्षता के साथ-साथ बदलते ऑपरेशनल वातावरण को समझना भी आवश्यक है।
हायर कमांड कोर्स के अधिकारियों का उत्तराखंड के फॉरवर्ड एरिया का दौरा इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के विशिष्ट भूभाग, सामरिक महत्व और वास्तविक परिचालन परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से समझना सैन्य नेतृत्व के लिए उपयोगी अनुभव प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि सैन्य नेतृत्व के लिए तकनीक की समझ केवल उपकरणों और प्रणालियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके साथ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, ऑपरेशनल वास्तविकताओं और युद्ध के बदलते चरित्र को समझना भी जरूरी है।
राज्यपाल ने निरंतर सीखने, तकनीकी अनुकूलन और विभिन्न स्तरों पर बेहतर एकीकरण को भविष्य की सैन्य तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप सैन्य नेतृत्व को निरंतर नई क्षमताओं और तकनीकों के साथ स्वयं को तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक, प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव के बीच बेहतर समन्वय भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर अध्ययन, नवाचार और तकनीकी क्षमताओं का प्रभावी एकीकरण आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों के साथ सामरिक भूगोल और परिचालन परिस्थितियों की समझ सैन्य नेतृत्व की प्रभावशीलता को मजबूत करने में सहायक होगी।
