मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रतिभाग किया। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर रामपुर तिराहा कांड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में शहीद हुए जिन आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर में स्थित पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने तथा संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणा की। संग्रहालय में उत्तराखण्ड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा और लोक संस्कृति से संबंधित सामग्री को शामिल किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आंदोलन के इतिहास से परिचित हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। इसी भावना के अनुरूप राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को भी भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के सपनों के अनुरूप राज्य का निर्माण करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के आशीर्वाद से उन्हें लगातार छठे वर्ष रामपुर तिराहा सहित खटीमा एवं अन्य शहीद स्थलों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 01 एवं 02 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। उन्होंने कहा कि पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियां उत्तराखण्ड की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उनके सपनों के अनुरूप समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
