
मुरैना, एमपी: बटेश्वर महादेव जो की मध्य प्रदेश के भिंड जिले में स्थित 200 मंदिरों की श्रृंखला है। यह एक प्राचीन स्थल है जहां शिव भक्तों की आस्था का झरना निरंतर बहता है। मगर 23 मार्च को यहां एक खास आयोजन हुआ, जिसमें नितिन फौजी के द्वारा हरिद्वार की हर की पैड़ी से भरे गए गंगाजल से बटेश्वर महादेव को जलाभिषेक किया गया। नितिन की यह यात्रा सिर्फ धार्मिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बटेश्वर के 200 प्राचीन मंदिरों के संरक्षण को लेकर है।
नितिन ने खुद को शिव भक्ति में किया समर्पित
नितिन फौजी वैसे से गुर्जर प्रतिहार वंश से मगर वो खुद को शिव भक्ति में समर्पित मानते हैं। नितिन ने हजारों लोगों की मौजूदगी में इस पवित्र स्थल पर जलाभिषेक किया। साथ ही बटेश्वर के मंदिरों के संरक्षण के लिए एक मिशन की शुरुआत की। उनका कहना है कि इन मंदिरों को बचाना और उनका संरक्षण करना, हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सबसे बड़ा कदम है।
नितिन का कहना है कि बटेश्वर के ये मंदिर हमारी विरासत का अहम हिस्सा हैं और हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए। इस यात्रा का उद्देश्य सिर्फ आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि इन मंदिरों के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इनकी महिमा को समझ सकें।
नितिन ने हरिद्वार से शुरू की थी पद यात्रा
नितिन फौजी ने 6 मार्च को हरिद्वार से हर की पैड़ी से गंगाजल भरकर अपनी पद यात्रा की शुरुआत की थी। उनकी इस यात्रा का मकसद बटेश्वर मंदिरों की श्रृंखला के इन मंदिरों को संरक्षित करना है, जिससे की गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं द्वारा निर्मित ये मंदिर सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही सिमटकर ना रह जाए। क्योंकि ये मंदिर हिंदुस्तान की प्राचीन संस्कृति का एक हिस्सा है, इनकी ताल्लुक किसी खास समुदाय विशेष से नहीं है बल्कि ये हमारे देश की धरोहर है।
गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं द्वारा निर्मित हैं बटेश्वर के मंदिर
इन सभी मंदिरों का निर्माण गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं ने करवाया था, जिसमें गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज भी शामिल हैं। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर बताते हैं कि ये भी मंदिर अलग-अलग समय पर गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं के द्वार ही बनवाए गए थे।

मगर प्राकृतिक आपदा के दौरान मंदिरों को काफी नुकसान पहुंचा, जिससे ये मंदिर धराशायी हो गए। किसी तरह से ASI का ध्यान इस ओर आकृषित हुआ और केके मोहम्मद साहब की अगुवाई में इन मंदिरों की मरम्मत का काम शुरू हुआ। अभी तक 60 मंदिरों को उनके पुराने स्वरूप में लाया जा चुका है मगर 100 से 150 मंदिर अभी भी जीर्णशीर्ण हालात में हैं, नितिन इन मंदिरों के संरक्षण की ही आवाज उठा रहे हैं।

नितिन की मंजिल मुश्किल थी मगर नितिन ने अपना उत्साह बनाए रखा। लोगों का साथ मिलता गया और वो अपनी मंजिल पर आगे बढ़ते गए आखिरकार वो अपनी मंजिल तक सकुशल पहुंच गए।
साथ मिलता गया कारवां आगे बढ़ता गया
नितिन की पद यात्रा में न केवल नितिन फौजी बल्कि हजारों की संख्या में आम श्रद्धालुओं और लोगों ने भी भाग लिया और बटेश्वर के मंदिरों में जलाभिषेक कर गुर्जर प्रतिहार वंश के इन मंदिरों के प्रति अपनी आस्था जाहिर की।

बटेश्वर में नितिन फौजी की यह यात्रा जरूर एक शुरुआत है, लेकिन हमें इस दिशा में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जय बटेश्वर महादेव।

नितिन का उत्साह बढ़ाने के लिए हजारों की संख्या में लोग बटेश्वर पहुंचे थे, जिन्होंने नितिन की इस मुहिम की तारीफ की और कहा कि उनकी ये यात्रा युवा पीढ़ी को गुर्जर प्रतिहार वंश के इन मंदिरों के इतिहास के बारे में प्रेरित करेगी।
