
विधानसभा सत्र में प्रतिभाग करने के लिए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) जाते समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जनपद स्थित पौराणिक आदिबद्री मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उत्तराखंड के प्राचीन मंदिर राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आदिबद्री मंदिर भी भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्राचीन देवस्थलों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये स्थल हमें जनसेवा और लोककल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। चमोली जनपद में स्थित आदिबद्री क्षेत्र धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं। भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के लिए जाते समय मुख्यमंत्री का मंदिर में पूजा-अर्चना करना उनके कार्यक्रम का धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष रहा। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित प्राचीन मंदिर स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से भी जुड़े हुए हैं। इन देवस्थलों का संरक्षण राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत में आदिबद्री का महत्व
उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में जाना जाता है और यहां अनेक प्राचीन मंदिर तथा तीर्थस्थल धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। चमोली जनपद का आदिबद्री मंदिर भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित ऐसे मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। मंदिरों से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां स्थानीय समुदायों को अपनी विरासत से जोड़े रखने में भी भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदिबद्री मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्राचीन देवस्थलों को जनसेवा और लोककल्याण की प्रेरणा देने वाला बताया। उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
