देहरादून में मुख्यमंत्री आवास अब सिर्फ प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया मॉडल बनकर उभर रहा है जहां “हनी मॉडल” के जरिए पहाड़ में आजीविका की नई राह दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इस दौरान सामने आया कि महज 45 दिनों की अवधि में यहां 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
सीएम धामी ने स्पष्ट कहा कि विशेषकर पर्वतीय और वन क्षेत्रों में शहद उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है और इसके लिए एक मजबूत नीति तैयार करने की जरूरत है उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स की स्थापना के लिए प्रभावी योजना बनाई जाए ताकि स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता दी जाएगी और इससे जुड़े किसानों व उद्यमियों को विशेष सब्सिडी दी जाएगी जिससे यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौन पालन यानी बीकीपिंग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना बेहद जरूरी है क्योंकि यह न केवल आय का स्थायी स्रोत बन सकता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है मधुमक्खियां परागण के जरिए जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने उद्यान प्रभारी को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री आवास परिसर में वर्षभर शहद उत्पादन के लिए उपयुक्त पुष्पीय और परागयुक्त पौधों का रोपण किया जाए साथ ही “थ्री-बी” यानी बर्ड फ्रेंडली, बी फ्रेंडली और बटरफ्लाई फ्रेंडली गार्डन विकसित करने की दिशा में कार्य शुरू किया जाए।
सीएम धामी ने विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व जैसे अवसरों पर “थ्री-बी” आधारित पौधरोपण अभियान चलाने पर भी जोर दिया उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से न केवल पर्यावरण को मजबूती मिलेगी बल्कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन को भी स्थायी बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड में जहां एक ओर पलायन की चुनौती लंबे समय से बनी हुई है वहीं अब मधुमक्खी पालन जैसे विकल्प रोजगार के नए दरवाजे खोल सकते हैं यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कम निवेश में बेहतर मुनाफा संभव है और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह सबसे उपयुक्त स्वरोजगार मॉडल बन सकता है।
सीएम आवास में 45 दिनों में 520 किलो शहद उत्पादन की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर सही योजना और तकनीक के साथ काम किया जाए तो उत्तराखंड के गांवों में भी आर्थिक क्रांति लाई जा सकती है।
यह “हनी मॉडल” अब सिर्फ एक प्रयोग नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा बन चुका है जो आने वाले समय में हजारों युवाओं और किसानों के लिए रोजगार का मजबूत आधार बन सकता है
